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Fact Check: बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डर पर तार लगाते सैनिकों का वीडियो एआई निर्मित

बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर पर तार लगाने वाले लोगों का वायरल वीडियो फेक है। यह वायरल वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है। इसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बॉर्डर पर तार लगाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जवानों के साथ कुछ लोग बॉर्डर पर तार लगा रहे हैं। इस वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डर का है। कहा जा रहा है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनने के बाद तारबंदी कर बॉर्डर बंद किया जा रहा है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में वायरल वीडियो को फेक पाया। वायरल वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है। इस वीडियो को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है।

क्या हो रहा है वायरल?

एक्स यूजर ‘गोपाल सनातनी’ ने 26 मई 2026 को वायरल वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “वोट सही जगह देने से देश सुरक्षित हो जाता है अब भारत की जनता का हक कोई बाहर से आकर नही छीन पायेगा।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो के कई कीफ्रेम निकालकर उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें वीडियो में दिख रही घटना से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली। हमने कीवर्ड्स की मदद से गूगल पर भी सर्च किया, लेकिन हमें दावे से जुड़ी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली।

वीडियो को गौर से देखने पर हमने पाया कि एक जवान के हाथ में एक पेपर जैसा दिखने वाला कुछ सामान अचानक आता है और फिर वह गायब हो जाता है। एक जगह तार लगा रहा शख्स, तारों में घुस जाता है। फिर कुछ देर बाद वह बाहर निकल आता है और उसे कुछ भी नहीं होता है, जबकि वीडियो में नजर आ रहे तार नुकीले हैं। ऐसे में हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने इस वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल की मदद से चेक किया। ‘हाइव मॉडरेशन’ की एनालिसिस इस वीडियो को एआई से बनाए जाने की अधिकतम संभावना (करीब 80 फीसदी) की पुष्टि करती है।

वायरल वीडियो में एआई की पुष्टि के लिए हमने अपने सहयोगी ‘टीआईए’ (पूर्व में एमसीए) की पहल ‘डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट’ (डीएयू) से संपर्क किया। उन्होंने हमारे साथ कई अन्य डिटेक्शन टूल्स के एनालिसिस शेयर किए।

डीएयू ने एआई डिटेक्शन टूल ‘Imagewhisperer’ के माध्यम से वीडियो का परीक्षण किया, जिसने पुष्टि की कि वायरल वीडियो असली नहीं है।

डीएयू ने एआई डिटेक्शन टूल ‘AI or Not’ की मदद से भी वीडियो को सर्च किया। इस टूल ने करीब 99 फीसदी तक वीडियो के एआई से बने होने की संभावना जताई।

डीएयू ने अपने निष्कर्ष में बताया कि वीडियो में नजर आ रहे लोगों और जवानों के चेहरे और शरीर के अंग काफी अटपटे हैं। कई दृश्यों में शरीर के कई अंग लंबे होते हुए नजर आते हैं। वीडियो में कई जगह कांटेदार तार आपस में जुड़ते और अलग होते हुए भी नजर आते हैं।

क्या है संदर्भ?

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि सीएए की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जो लोग इसके दायरे में नहीं आते हैं, वे अवैध घुसपैठिए हैं। ऐसे लोगों को सरकार गिरफ्तार कर BSF को सौंप देगी। साथ ही भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर भी सुरक्षा को बढ़ाया जाएगा। बॉर्डर से जुड़ी 27 किलोमीटर जमीन BSF को सौंपी जाएगी, ताकि वहां फेंसिंग लगाई जा सके और सुरक्षा स्ट्रक्चर बनाया जा सके। पूरी रिपोर्ट को यहां पर पढ़ा जा सकता है।

अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले एक्स यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को करीब 45 हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर पर तार लगाने वाले लोगों का वायरल वीडियो फेक है। यह वायरल वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है। इसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है।

  • Claim Review : बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश बॉर्डर को बंद किया जा रहा है।
  • Claimed By : X User-गोपाल सनातनी
  • Fact Check : झूठ
Our Sources
  1. AI Detection Tool Hive Moderation
  2. AI Detection Tool Image whisperer
  3. AI Detection Tool AI or Not
  4. News Report by Dainik Bhasker, Published on 7 Days Ago

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