Fact Check: नोएडा में श्रमिकों ने फिर से नहीं किया प्रदर्शन, सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का पुराना वीडियो वायरल
Post of X Handle, Dated 7 May 2026 Post of Arpit Yadav Facebook Page, Dated 1 Oct 2020 Post of SP Facebook Page, Dated 1 Oct 2020
- By: ankit sharma
- Published: May 27, 2026 at 05:30 PM
- Updated: May 27, 2026 at 05:40 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। देश के कई हिस्सों में पिछले दिनों फैक्ट्री वर्कर्स ने अपना वेतन और बोनस बढ़ाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था। उसी क्रम में यूपी के नोएडा में भी प्रदर्शन किया गया था। हालांकि, बाद में यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था। अब इसी प्रदर्शन के नाम पर एक वीडियो वायरल करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। इस वीडियो में पुलिस को बेरहमी से लाठीचार्ज करते हुए देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इस वीडियो को नोएडा का हालिया वीडियो मानकर शेयर कर रहे हैं। विश्वास न्यूज ने विस्तार से वायरल पोस्ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। जांच में पता चला कि वायरल वीडियो वर्ष 2020 का है। उस वक्त हाथरस कांड की पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस घटना के वीडियो को अब नोएडा का बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘Ranglal Dhangar’ ने 27 मई 2026 को एक वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया, “पुलिस के डंडे टूट गए लेकिन भाई का हौसला नहीं टूटा, देश में ऐसे नेता होने चाहिए, AC मैं बैठने वाले नहीं। नोएडा फेज 2 में करीब 1,000 से ज्यादा फैक्ट्री कर्मचारी वेतन, बोनस और शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। श्रमिक ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे थे जोहमारा संविधान ने दिया हुआ अधिकार है। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई के दौर में ₹11,000-₹13,000 की पगार में गुजारा करना असंभव है। जिसके बाद ये सब देख सकते है पुलिस कीड़े मकौड़े की तरह से जानता को मारती हैं। क्या हम कॉक्रोच है?”

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स भी इस वायरल पोस्ट को फर्जी दावे के साथ शेयर कर रहे हैं। वायरल पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
नोएडा के नाम पर वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर पुलिस वाले मास्क पहने हुए नजर आ रहे हैं। सामान्य तौर पर मास्क पहने पुलिस वाले दिखाई नहीं देते हैं। इससे हमें शक हुआ कि यह वीडियो देश में कोविड के वक्त का हो सकता है। इसके बाद वीडियो के कई ग्रैब्स निकाले गए और इन्हें सर्च किया गया।
सर्च के दौरान वायरल वीडियो की एक ग्रैब (स्क्रीन शॉट) हमें ‘बघीरा’ नाम के एक्स हैंडल पर मिली। इसे 7 मई 2026 को पोस्ट करते हुए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज का बताया गया। इसी पोस्ट के कमेंट में लक्ष्मण नाम के एक यूजर ने 8 मई 2026 को लिखा कि तस्वीर में पिटते हुए दिख रहा व्यक्ति कानपुर का अर्पित यादव है।
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इस क्लू के आधार पर हमने अर्पित यादव को सोशल मीडिया पर सर्च किया। हमें इनका फेसबुक पेज मिला, जहां वायरल वीडियो मौजूद था। अर्पित यादव ने 1 अक्टूबर 2020 को यह वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “न डरेंगे न झुकेंगे। आज लखनऊ में। बहन हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल ज़िंदा हैं। आज लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गिरी जी के नेतृत्व में प्रदर्शन के दौरान…..गिरफ़्तार।” इसी वीडियो को समाजवादी पार्टी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी 1 अक्टूबर 2020 को पोस्ट किया गया था।

हमारी अब तक की जांच से यह स्पष्ट हो गया कि वायरल वीडियो नोएडा के हालिया घटनाक्रम से नहीं जुड़ा है। यह वीडियो वर्ष 2020 का है, जब सपा ने लखनऊ में हाथरस पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन किया था।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण, नोएडा के क्राइम रिपोर्टर मुनीष शर्मा से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि वायरल वीडियो नोएडा का नहीं है।
क्या है संदर्भ?
नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिकों ने प्रदर्शन किया था, जो बाद यह उग्र हो गया था। हिंसा के आरोप में पुलिस ने एक्टिविस्ट, पत्रकार और मजदूर संगठनों से जुड़े कुछ लोगों समेत कई मजदूरों को हिरासत में लिया था। इनमें से कई अभी भी जेल में बंद हैं। इनकी जमानत नहीं हो पाई है।
वहीं, हाथरस के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती पर दर्दनाक हमला हुआ था। उसके भाई ने गांव के ही संदीप के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था। युवती के बयानों के आधार पर मुकदमे में गांव के ही रवि, रामकुमार और लवकुश के नाम और कई धाराएं बढ़ाई गईं। 29 सितंबर 2020 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में युवती की मृत्यु हो गई थी। दो मार्च 2023 को रवि, रामकुमार व लवकुश को बरी कर दिया था। मुख्य आरोपित संदीप को धारा 304 और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। फिलहाल वह जेल में है। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सपा और कांग्रेस ने तब जोरदार प्रदर्शन किया था।
जांच के अंत में ‘Ranglal Dhangar’ के प्रोफाइल की जांच की गई। यूजर को फेसबुक पर 19 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर मध्य प्रदेश के मंदसौर का रहने वाला है। यह अकाउंट 3 मार्च 2012 को बनाया गया था।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट भ्रामक साबित हुई। हाथरस की पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सपा ने साल 2020 में लखनऊ में प्रदर्शन किया था। उसी से जुड़े वीडियो को अब नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन का बताकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
- Claim Review : जांच के अंत में ‘Ranglal Dhangar’ के प्रोफाइल की जांच की गई। यूजर को फेसबुक पर 19 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर मध्य प्रदेश के मंदसौर का रहने वाला है। यह अकाउंट 3 मार्च 2012 को बनाया गया था।
- Claimed By : जांच के अंत में ‘Ranglal Dhangar’ के प्रोफाइल की जांच की गई। यूजर को फेसबुक पर 19 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर मध्य प्रदेश के मंदसौर का रहने वाला है। यह अकाउंट 3 मार्च 2012 को बनाया गया था।
- Fact Check : झूठ
- Post of X Handle, Dated 7 May 2026
- Post of Arpit Yadav Facebook Page, Dated 1 Oct 2020
- Post of SP Facebook Page, Dated 1 Oct 2020
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