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Fact Check : बैलगाड़ी रैली की पुरानी तस्‍वीर को अब किसान आंदोलन के नाम पर किया गया वायरल

विश्‍वास न्‍यूज की जांच में पता चला कि किसान आंदोलन के पक्ष में गांव में बैलगाड़ी रैली के नाम से वायरल पोस्‍ट फर्जी निकली। 2018 में बालाघाट में युवा कांग्रेस की ओर से एक रैली निकाली गई थी। उसी की तस्‍वीर को अब कुछ लोग किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल कर रहे हैं।

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। देश की राजधानी दिल्‍ली के चारों ओर सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच एक तस्‍वीर वायरल हो रही है। इसमें कुछ बैलगाड़ियों को देखा जा सकता है। इन बैलगाड़ियों पर कुछ लोग प्‍लेकार्ड और झंडा लेकर बैठे हुए दिख रहे हैं। यूजर्स दावा कर रहे हैं कि किसान आंदोलन अब गांव तक पहुंच गया है। तस्‍वीर उसी की है।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल तस्‍वीर की जांच की। हमें पता चला कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के खिलाफ मध्‍य प्रदेश के बालाघाट में 2018 में हुए एक प्रदर्शन की तस्‍वीर को अब किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल किया जा रहा है। इस प्रदर्शन का आयोजन युवक कांग्रेस की ओर से किया गया था। हमारी जांच में वायरल पोस्‍ट फर्जी निकली।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर बादल यादव देव ने 31 जनवरी को एक तस्‍वीर को अपलोड करते हुए लिखा : ‘ये थप्पड़ है गोदी मीडिया के मुंह पर… देश के सबसे पिछड़े गांवों तक भी किसानों का इन्कलाब पहुंच गया है..’

इस तस्‍वीर को कई यूजर्स किसान आंदोलन की समझकर वायरल कर रहे हैं। फेसबुक पोस्‍ट का आर्काइव्‍ड वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले किसान आंदोलन के नाम से वायरल हो रही बैलगाड़ियों की तस्‍वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड करके सर्च किया। पहला ही लिंक हमें पत्रिका डॉट कॉम का मिला। 13 सितंबर 2018 को पब्लिश खबर में बताया गया कि मध्‍य प्रदेश के बालाघाट में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफे के विरोध में युवा कांग्रेस ने बैलगाड़ी रैली निकाली। तस्‍वीर में दिख रहे एक प्‍लेकार्ड पर हमें जिला युवा कांग्रेस बालाघाट भी लिखा हुआ नजर आया।

हमें मध्‍य प्रदेश से प्रकाशित नईदुनिया खबर की वेबसाइट पर भी बालाघाट की बैलगाड़ी रैली से जुड़ी पुरानी खबर मिली। इसमें बताया गया कि पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों के विरोध में मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष के नेतृत्व में गुरुवार को बस स्टैंड स्थित कार्यालय से बैलगाड़ी रैली निकाली गई। इस रैली में ‘सखी संईया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाये जात है’, गाने का इस्तेमाल करते हुए नगर का भ्रमण किया गया। भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रदर्शन किया गया। बैलगाड़ी रैली में करीब 30 से 35 बैलगाड़ियों को शामिल किया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें।

ज्‍यादा जानकारी के लिए विश्‍वास न्‍यूज ने मध्‍य प्रदेश के नईदुनिया में संपर्क किया। बालाघाट के नईदुनिया के प्रतिनिधि श्रवण शर्मा ने बताया कि कृषि कानून के विरोध में इंटरनेट पर वायरल हो रही यह तस्वीर मध्य प्रदेश के बालाघाट में सितंबर 2018 में युवक कांग्रेस द्वारा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर किए गए विरोध प्रदर्शन की है। हाल में बालाघाट में कृषि कानून के विरोध में कोई बैलगाड़ी रैली नहीं निकाली गई है।

जांच के अंतिम चरण में विश्‍वास न्‍यूज ने फेसबुक यूजर बादल यादव देव के अकाउंट की जांच की। हमें पता चला कि इस अकाउंट को जनवरी 2018 में बनाया गया। इसे 91 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्‍वास न्‍यूज की जांच में पता चला कि किसान आंदोलन के पक्ष में गांव में बैलगाड़ी रैली के नाम से वायरल पोस्‍ट फर्जी निकली। 2018 में बालाघाट में युवा कांग्रेस की ओर से एक रैली निकाली गई थी। उसी की तस्‍वीर को अब कुछ लोग किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल कर रहे हैं।

  • Claim Review : देश के सबसे पिछड़े गांवों तक भी किसानों का इन्कलाब पहुंच गया है..
  • Claimed By : फेसबुक यूजर बादल यादव देव
  • Fact Check : झूठ

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